जानना चाहते हैं कौन उठा रहा है कन्हैया का खर्चा?

बायीं तस्वीरकार से मुंबई से पुणे जा रहे कन्हैया की है। इस यात्रा में कन्हैया के ड्राइवर बने एनसीपी के विधायक जीतेंद्र आव्हाड। दायीं तस्वीर नीतीश और कन्हैया की है।

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार का नाम जब सबसे पहली बार चर्चा में आया था तो मीडिया ने उसकी गरीबी की कहानियां दिखाई थीं। बताया गया कि उसके पिता बीमार हैं और मां सिर्फ 3000 रुपये कमाती हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से कन्हैया की लग्जरी लाइफ चर्चा में है। एक महीने के अंदर उसकी जिंदगी बदल चुकी है। अब वो कहीं भी फ्लाइट के बिजनेस क्लास में आता-जाता है और लेटेस्ट आईफोन रखता है। जेएनयू में एक करीबी एक सूत्र ने हमें उसकी नई लाइफस्टाइल के बारे में सिलसिलेवार ढंग से कुछ बातें बताई।

कैसे बदल गई कन्हैया की जिंदगी?

हमारे सूत्र ने बताया कि जेल से छूटकर आने के बाद भी वो एक आम छात्रनेता ही था। बस मिलने-जुलने वालों की संख्या बढ़ गई थी। लेकिन 22 मार्च को राहुल गांधी से हुई मुलाकात ने कन्हैया की जिंदगी को बदल दिया। राहुल गांधी के साथ करीब एक घंटे चली मुलाकात में क्या बात हुई ये टॉप सीक्रेट रहा। कन्हैया के साथ उसके संगठन AISF के अध्यक्ष सैयद वलीउल्ला कादरी और सेक्रेटरी विश्वजीत और जेएनयू के 2 सबसे भरोसेमंद लोग थे। किसी ने बाहर आकर राहुल गांधी के साथ हुई बातचीत के बारे में बात नहीं की। अगर किसी ने पूछा भी तो कह दिया कि राहुल गांधी ने समर्थन देने के लिए बुलाया था। लेकिन यह सवाल सबके मन में था कि सिर्फ समर्थन देने के लिए एक घंटे तक मुलाकात कैसे चल सकती है।

तस्वीर में बायीं तरफ पॉकेट में हाथ डाले खड़ा शख्स सलमान निजामी है। राहुल गांधी के बगल में सफेद कुर्ता पहने एनएसयूआई के अध्यक्ष रोज़ी जॉन हैं। इन दोनों को ही कन्हैया का इंतजाम देखने की जिम्मेदारी दी गई है।

तस्वीर में बायीं तरफ पॉकेट में हाथ डाले खड़ा शख्स सलमान निजामी है। राहुल गांधी के बगल में सफेद कुर्ता पहने एनएसयूआई के अध्यक्ष रोज़ी जॉन हैं। इन दोनों को ही कन्हैया का इंतजाम देखने की जिम्मेदारी दी गई है।

‘राहुल से मुलाकात के बाद था बेहद खुश’

राहुल से मिलने के बाद कन्हैया बहुत खुश था। यह मुलाकात अचानक नहीं हुई थी। इसकी भूमिका पिछले 3-4 दिन से बन रही थी। इसी मुलाकात के इंतजार में उसने 4 दिन पहले यानी 18 मार्च को अरविंद केजरीवाल को गच्चा दे दिया था। केजरीवाल से वो मुलाकात सीपीआई के नेता डी राजा की बेटी अपराजिता ने फिक्स कराई थी। मिलने के लिए न पहुंचने पर अपराजिता ने फोन पर नाराजगी भी जताई थी। लेकिन किसी दूसरे नेता से मिलने से पहले कन्हैया राहुल से मिल लेना चाहता था। यही वजह थी कि वो बंगाल और केरल चुनाव में लेफ्ट के लिए प्रचार करने नहीं गया। जबकि खुद सीताराम येचुरी ने इसका एलान किया था। कन्हैया ने सीताराम येचुरी की बात नहीं मानी, क्योंकि वो राहुल गांधी को नाराज नहीं करना चाहता था।

सलमान निजामी को बनाया कॉन्टैक्ट पर्सन

हमारे सूत्र को बाद में यह पता चला कि राहुल ने मुलाकात में जम्मू कश्मीर के युवा कांग्रेस नेता सलमान निजामी को कन्हैया के लिए कॉन्टैक्ट पर्सन बनाया है। सलमान निजामी आजकल राहुल गांधी की कोर टीम के सदस्य हैं। इससे पहले वो भारत-विरोधी बयानों की वजह से चर्चा में रह चुके हैं। कन्हैया से कहा गया कि वो देश भर के विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों और नौजवानों की सभाएं करे। इन सभाओं के लिए आने-जाने, ठहरने का सारा इंतजाम कांग्रेस करेगी। यह भी कहा गया कि वो किसी भी तरह की दिक्कत होने पर NSUI के अध्यक्ष रोज़ी जॉन से भी बात कर सकता है। रोज़ी जॉन भी राहुल गांधी के साथ हुई मीटिंग में मौजूद थे।

नीतीश कुमार के साथ भी संपर्क में कन्हैया

सारी हलचल के बीच वो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भी संपर्क में रहा। उनसे कई राउंड फोन पर बातचीत भी हुई। इसी महीने की शुरुआत में कन्हैया को नीतीश कुमार की तरफ से कुछ रुपये भी मिले। ये पैसे सीधे दोनों के एकाउंट के बीच ट्रांसफर नहीं हुए, बल्कि जान-पहचान वाले दूसरे लोगों के जरिए भेजे गए। इन्हीं पैसों से कन्हैया ने अपना पुराना फोन बदलकर पसंदीदा आईफोन खरीदा।

कन्हैया के बिजनेस क्लास से सफर की कहानियां अब अखबारों में भी छपने लगी हैं।

एक गरीब छात्र के बिजनेस क्लास से सफर की कहानियां अब अखबारों में भी छपने लगी हैं।

कन्हैया के पुराने साथी हैं नाराज़ हैं

लेफ्ट छोड़ कांग्रेस के साथ खड़े होने की वजह से जेएनयू में कन्हैया के कई पुराने साथी नाराज हैं। अभी कोई खुलकर कुछ नहीं कह रहा है, लेकिन उन्हें लग रहा है कि कन्हैया असली मुद्दों से भटक गया है। हालांकि कन्हैया ने सबसे यह कह रखा है कि वो राष्ट्रीय स्तर पर मोदी-विरोधी मोर्चा बनाने के लिए काम कर रहा है। इसके लिए कांग्रेस का सहयोग लेने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन उसकी लग्जरी लाइफस्टाइल उसके बहुत से साथियों को खटक रही है।

(इस लेख में लिखी जानकारियां नाम पब्लिश न करने की शर्त पर कन्हैया के एक करीबी साथी ने हमें दी हैं। हम स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं कर सकते। इसी सूत्र ने पहले हमें यह खबर भी दी थी कि जेल से रिहाई के बाद का भाषण एक महिला पत्रकार ने तैयार करवाया था। बाद में वह दावा सही साबित भी हुआ था।)

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