राजस्थान, पंजाब, हरियाणा भी लातूर बनने वाले हैं!

बायीं तस्वीर नासा की तरफ से जारी की गई है। इसमें प्रभावित क्षेत्र को दिखाया गया है, जहां ग्राउंड वॉटर गायब हो रहा है।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में पानी के संकट की खबरें सुर्खियों में हैं, लेकिन बहुत जल्द ऐसे ही हालात राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में भी पैदा हो सकते हैं। ये सिर्फ अनुमान नहीं है, अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की एक स्टडी में यह बात सामने आई है। नासा के हाइड्रोलॉजिस्ट मैट रॉडेल के मुताबिक धरती के जिन इलाकों में ग्राउंड वॉटर सबसे ज्यादा तेज़ी से नीचे जा रहा है, उनमें राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली हैं। इसकी चपेट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का भी कुछ इलाका है।

कहां गायब हो रहा है भूमिगत पानी?

स्टडी के मुताबिक ये वो क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा मानव सक्रियता (Human activities) हो रही हैं। सिंचाई, कंस्ट्रक्शन, इंडस्ट्री और पीने की जरूरतों के लिए जमीन से जितना पानी खींचा जा रहा है, उतनी भरपाई नहीं हो पा रही है। इसके पीछे बड़ी वजह बारिश में कमी और रेन वॉटर हारवेस्टिंग का न होना है। मैट रॉडेल की ये स्टडी ‘नेचर’ पत्रिका में छप भी चुकी है। इसके मुताबिक ग्राउंड वाटर को बाहर निकाल कर इस्तेमाल करना जितना आसान होता है, उसकी भरपाई मुकाबले बेहद धीमी प्रक्रिया होती है। इसलिए जरूरी है कि पानी निकलने और इसके वापस धरती में जाने का प्राकृतिक अनुपात बना रहे।

नासा की तरफ से जारी वो मैप, जिसे देखकर आप पता कर सकते हैं कि आपके राज्य में ग्राउंड वॉटर की क्या स्थिति है।

नासा की तरफ से जारी वो मैप, जिसे देखकर आप पता कर सकते हैं कि आपके राज्य में ग्राउंड वॉटर की क्या स्थिति है।

सैटेलाइट स्टडी में दिखा है बदलाव

जिन इलाकों में ग्राउंड वॉटर तेजी से नीचे जा रहा है, वहां की वनस्पतियों और खेती में बदलाव का पैटर्न भी धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है। नासा की सैटेलाइट इमेजिंग स्टडी में भी इस बदलाव को नोटिस किया गया है। इसके मुताबिक प्रभावित क्षेत्र में ग्राउंड वॉटर सालाना एक फुट की रफ्तार से नीचे जा रहा है। 2002 से 2008 के बीच इस पूरे क्षेत्र में 109 क्यूबिक किलोमीटर भूमिगत जल गायब हो गया। यह भारत के सबसे बड़े जलाशय ऊपरी वैणगंगा की क्षमता का दोगुना है। इस पूरे इलाके में बीते 10 साल में कुएं, तालाब, बावड़ियों के सूखने का क्रम तेज़ी से देखा गया है।

संकट से बचाव का क्या है उपाय?

नासा की इसी स्टडी में संकट के हल का लॉन्ग टर्म प्लान बताया गया है। इसके मुताबिक जितनी भी बारिश इस क्षेत्र में होती है उसका ज्यादा से ज्यादा पानी ग्राउंड वॉटर हार्वेस्टिंग से रोकना होगा। अगर ऐसा हो पाया तो अगले 10 से 20 साल में हालात बेहतर हो सकते हैं। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में आबादी के बढ़ते प्रेशर को कम करना भी जरूरी है। क्योंकि जब तक खेती से लेकर नए मकान बनाने तक में पानी की डिमांड कम नहीं होगी है, संकट बना ही रहेगा।

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