इमेज चमकाने को करोड़ों का ठेका देंगे केजरीवाल!

फोटो सौजन्य- पीटीआई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी इमेज चमकाने के लिए अब पब्लिक रिलेशन यानी पीआर कंपनी की मदद लेंगे। इसके लिए करोड़ों रुपये फीस देकर पीआर एजेंसी को ठेका देने का प्रॉसेस अभी चल रहा है। देश-विदेश की 10 से ज्यादा बड़ी पीआर कंपनियां केजरीवाल की इमेज चमकाने का ठेका पाने की रेस में हैं। इस बारे में आखिरी फैसला बहुत जल्द होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री पद की तैयारी का है इरादा!

आम आदमी पार्टी के प्रचार से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक अरविंद केजरीवाल को अब लगने लगा है कि उनकी मौजूदा इमेज दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद तक तो ठीक है, लेकिन अगर उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी करनी है तो इमेज बदलनी होगी। 2019 में अगले लोकसभा चुनाव होने हैं, इसे देखते हुए केजरीवाल अभी से तैयारी शुरू कर देना चाहते हैं। इसी नीयत से उन्होंने अपने विज्ञापन दिल्ली के अलावा पूरे देश के अखबारों, टीवी चैनलों और एफएम रेडियो पर देना शुरू किया है। इसके लिए उन्होंने इस साल भी 200 करोड़ रुपये का बजट रखा है। जो कई बड़े राज्यों के प्रचार बजट से भी ज्यादा है।

क्या है पीआर एजेंसी का प्लान?

केजरीवाल के पीआर का काम करने के लिए जिन एजेंसियों ने दावेदारी पेश की है, उनमें से कई विदेशी भी हैं। ये कंपनियां दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं और फिल्मी सितारों के पीआर का काम देखती हैं। जो कंपनियां इस रेस में शामिल हैं वो हैं- विज़क्राफ्ट, गोल्ड माइन एडवर्टिजमेंट, परफेक्ट रिलेशंस, उल्का, एफसीबी, प्रल्हाद कक्कड़ की कंपनी जेनेसिस, प्रीतिश नंदी, पिनस्टॉर्म और एचटीए। केजरीवाल की इमेज सुधारने के अलावा यह कंपनी दुनिया भर के बड़े नेताओं से उनकी मुलाकात भी फिक्स करवाएगी।

इमेज चमकाने पर केजरीवाल का फोकस

केजरीवाल और उनके करीबी लगातार कोशिश में हैं कि उन्हें विदेशों से सम्मान दिलाए जाएं, ताकि देश में लोग उन्हें ज्यादा गंभीरता से लें। इसी कोशिश के तहत अमेरिकी पत्रिका फॉर्च्यून में ‘दुनिया के 50 महानतम नेताओं’ की लिस्ट में अरविंद केजरीवाल का नाम डलवाया गया था। इसके बाद दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिकों पर अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में एक लेख छपा। इस लेख में कहा गया कि अमेरिका का स्वास्थ्य विभाग दिल्ली के इन मोहल्ला क्लीनिकों से सीख ले सकता है। जबकि सच्चाई यह है कि दिल्ली में सिर्फ 21 मोहल्ला क्लीनिक खुले हैं और जो खुले हैं उनसे भी ज्यादातर मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है। आरोप यह भी हैं कि आम आदमी पार्टी ने पैसे देकर यह लेख छपवाया था।

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