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टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी की मौत से सबक

Pragyaसॉरी गर्ल्स… एक तरफ हम लोग वीमेन एंपावरमेंट की बातें कर रहे हैं तो दूसरी तरफ कुछ उन महिलाओं की बात हो रही है जिन्होंने लड़ने की बजाय मरना पसंद कर लिया।

तुम अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना चाहती हो, तुम शायद किसी के सुझाव या सलाहें सुनना पसंद नहीं करती। तुम्हारी जिंदगी का मंत्र यही हो कि मेरी जिंदगी है तो नियम भी मैं ही बनाऊंगी और देखो तुमने अपनी जिंदगी का क्या कर डाला!

तुमने एक लड़के को चुना, उससे प्यार किया, हो सकता है तुम्हें उसके पास्ट के बारे में पता रहा हो, इसके बावजूद तुम उम्मीद करती हो कि सबकुछ अच्छा होगा और एक दिन सबकुछ ठीक हो जाएगा। क्यों?

तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि वो लड़का तुम्हारे लिए खुद को बदल लेगा? क्या तुम खुद को बदलने के लिए तैयार थी? तो फिर क्यों नहीं तुमने उसे छोड़ अपने लिए किसी बेहतर शख्स का हाथ थाम लिया। वैसे भी ये जानने में बहुत वक्त नहीं लगता कि आपका साथी सही है या गलत। अगर फैसले में गलती हुई है तो इससे बाहर निकलने में ही भलाई होती है। उस आदमी को छोड़ दो, क्योंकि उसे भी अपनी मर्जी की जिंदगी जीनी है।

अपनी जिंदगी की बागडोर अपने हाथ में लो और महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकारों की बात करना बंद करो।

(प्रज्ञा बड़थ्वाल ध्यानी Thoughtshop Advertising की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर यह पोस्ट लिखी है।)

 

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