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एयरटेल के मालिक को एक दुखी ग्राहक का खुला पत्र

अरुण पांडेय एक बिजनेस चैनल में पत्रकार हैं। यह पोस्ट उनके फेसबुक वॉल से साभार ली गई है।
अरुण पांडेय एक बिजनेस चैनल में पत्रकार हैं। यह पोस्ट उनके फेसबुक वॉल से साभार ली गई है।

माननीय सुनील भारती मित्तल जी,
आपसे अनुरोध है कि फुरसत मिले तो आप भी अपना 4G का एडवरटिजमेंट देख लें क्योंकि हम तो पक गए हैं देख देखकर। सियाचिन के पहाड़ों पर, माउंट एवरेस्ट पर, गुफाओं में कंदराओं में रेगिस्तान में सब जगह आपके 4G के सिग्नल अगर मिल जाते हैं तो फिर चांदनी चौक में, कनॉट प्लेस में, विले पार्ले में, मरीन ड्राइव में क्यों नहीं मिलते, वहां क्यों कॉल ड्रॉप होती है। आपकी ये कौन सी स्ट्रैटेजी है कि कंदराओं में गुफाओं में, रेगिस्तान में माउंट एवरेस्ट में तो आप पूरे सिग्नल दे रहे हैं लेकिन शहरों में नहीं दे रहे हैं, गज़ब हैं आप…. हम लोगों को इतना भी #@$%&…… मत समझिए। ऐसी अतिश्योक्ति सिर्फ अलंकारों में जमती है। एक दाने दाने में केसर वाला गुटका बेच रहा है, एक झूठे सिग्नल बेच रहा है। जबकि यही कंपनी कॉल ड्रॉप के मामले में ट्राई के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रो रोकर कह रही है कि कॉल ड्रॉप हम नहीं रोक सकते हम हर्जाना नहीं दे सकते। श्रीमान जी जब कॉल ड्रॉप नहीं रोक सकते तो ऐसे पकाऊ एड बंद करो और गुफाओं में टावर लगाने के बजाए शहरों में अपनी टेक्नोलॉजी ठीक करो्। अरे है कोई संस्था, एजेंसी, सरकार, रेगुलेटर जो इस तरफ ध्यान दे।
मैंने अभी चेक किया आपके दावे में कोई दम नहीं है। ना गुफाओं में इसके सिग्नल मिलते हैं और ना ही पहाड़ों पर। मैंने नोएडा के GIP मॉल की पार्किंग में जाकर टेस्ट किया ये पार्किंग जमीन की सतह से करीब 25 फीट नीचे होगी वहां सिग्नल नहीं मिले और फिर उसी मॉल के तीसरे माले में भी कॉल ड्रॉप हो रही है यानी कंदराओं और पहाड़ों दोनों जगह फ्लॉप। आप जबरन हमारे भेजे में ठूंसे जा रहे हैं कि सियाचिन से जैसलमेर तक हर जगह आपका तथाकथित 4G काम करता है। नहीं करता मैं कहता हूं नहीं करता। मेरा आप सभी लोगों से अनुरोध है कि आप लोग भी टेस्ट करें, चेक करें और फेसबुक में शेयर करें क्या है 4G की सच्चाई।
टेलीकॉम कंपनियों को पता चलना चाहिए कि करोड़ों कंज्यूमर को टेलीविजन में सिर्फ करोड़ों के एडवरटिजमेंट देकर नहीं बनाया जा सकता। हमें अब ठोस चीज चाहिए। सरकारों से सांसदों से विधायकों से जब हम हिसाब मांग सकते हैं तो कंपनियों से क्यों नहीं, आखिर हमारी गाढ़ी कमाई से जलवे तो यही काट रहे हैं। सबसे अपील है कि चुप मत रहिए अपने अपने अनुभव शेयर करिए और एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया की पोल खोलिए।

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