कांग्रेस में जाना चाहता है कॉमरेड कन्हैया!

ये तीनों तस्वीरें ट्विटर पर राहुल गांधी के ऑफिस की तरफ से जारी की गई हैं।

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पूरी तरह राजनीति में उतरना चाहता है। इसके लिए उसने कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का मन भी बना लिया है। मंगलवार को दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात भी इसी सिलसिले में थी। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक कन्हैया राजनीति में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है। राहुल गांधी से मुलाकात में फिलहाल यह तय हुआ है कि वो हैदराबाद और दूसरे विश्वविद्यालयों में जाकर बीजेपी सरकार के खिलाफ छात्रों का आंदोलन खड़ा करेगा। इसके लिए कांग्रेस उसे हर तरह की मदद करेगी। कांग्रेस में औपचारिक तौर पर शामिल होने का एलान बाद में सही वक्त पर किया जाएगा।

केजरीवाल से इसीलिए नहीं मिला कन्हैया!

पिछले हफ्ते कन्हैया को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मिलना था। वो मुलाकात सीपीआई नेता डी राजा और जेएनयू में पढ़ने वाली उनकी बेटी अपराजिता ने तय कराई थी। माना जा रहा है कि कन्हैया ने इस मुलाकात को टालने के लिए जानबूझकर ट्रैफिक जाम में फंसने का बहाना बना दिया था। केजरीवाल से मुलाकात से पहले वो राहुल गांधी से मिल लेना चाहता था। आज की मुलाकात के लिए टाइम भी कन्हैया ने ही मांगा था।

कम्युनिस्ट नहीं रहना चाहता है कन्हैया!

कन्हैया के करीबियों के मुताबिक वह कम्युनिस्ट राजनीति से ऊपर उठना चाहता है। उसे लग रहा है कि सीपीआई, आम आदमी पार्टी या नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड में जाकर वह लोकल नेता से ज्यादा हैसियत नहीं बना पाएगा। ऐसे में उसे अपने लिए कांग्रेस ही सबसे सही पार्टी लग रही है। जेल से छूटने के बाद से कन्हैया ने कांग्रेस के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला है। टीवी चैनलों को दिए इंटरव्यू में भी यूपीए सरकार के दौरान घोटालों या छात्रों पर अत्याचार जैसे सवालों को कन्हैया सफाई के साथ टालता रहा है। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में तो उसने यहां तक कह दिया था कि मेरी कोई पार्टी नहीं है, मैं अभी AISF का सदस्य हूं, सीपीआई का नहीं। इतना ही नहीं, उसने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग भी कहा और उस टिप्पणी को दोहराने से इनकार कर दिया था कि कश्मीर में सेना बलात्कार करती है।

असम चुनाव के प्रचार में कांग्रेस ने कन्हैया की तस्वीरों वाले होर्डिंग और पोस्टर लगाए हैं। कन्हैया ने इस पर कोई एतराज नहीं जताया है।

असम चुनाव के प्रचार में कांग्रेस ने कन्हैया की तस्वीरों वाले होर्डिंग और पोस्टर लगाए हैं। कन्हैया ने इस पर कोई एतराज नहीं जताया है।

मुलाकात में जेएनयू का कोई छात्रनेता नहीं

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष और राहुल गांधी की मुलाकात में जेएनयू का कोई बड़ा छात्रनेता शामिल नहीं हुआ। जो प्रतिनिधिमंडल राहुल गांधी से मिलने पहुंचा था उसमें AISF के अध्यक्ष सईद वलीउल्ला कादरी और कन्हैया के कुछ दोस्त शामिल थे। बाकी सभी कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के नेता थे। मुलाकात में कन्हैया राहुल गांधी को लगातार ‘भैया’ कहकर संबोधित कर रहा था। मुलाकात के बाद वह काफी हद तक आश्वस्त हो गया है और अब अगर उसकी केजरीवाल से मुलाकात होती भी है तो वह वाकई ‘शिष्टाचार मुलाकात’ ही होगी।

जेएनयू के लेफ्ट संगठनों में नाराज़गी

जेएनयू में जो वामपंथी छात्र संगठन कन्हैया की गिरफ्तारी के वक्त एकजुट होकर खड़े हो गए थे, उनमें ताजा रुख की वजह से नाराजगी है। उन्हें लग रहा है कि वह अपना पॉलिटिकल फ्यूचर बनाने के लिए उमर खालिद और अनिर्बान का ठीक से साथ नहीं दिया। कश्मीर को लेकर बदले रुख से भी कैंपस में सक्रिय कट्टर वामपंथी संगठन नाराज हैं। खुद आई के नेता भी नाराज हैं। केजरीवाल से मुलाकात कैंसिल होने के बाद बीते 3-4 दिन में उसने सीपीआई के बड़े नेताओं के फोन उठाने भी बंद कर दिए थे। लेफ्ट संगठनों से जुड़े कई छात्र और टीचर साफ-साफ कह रहे हैं कि शशि थरूर का  भगत सिंह जैसा कहना कांग्रेस की उस स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसके तहत वो उसे अपनी तरफ खींचना चाहती है।

जेएनयू के ज्यादातर छात्रसंघ अध्यक्ष कांग्रेस में

अगर कन्हैया कांग्रेस में चला जाता है तो इसमें ज्यादा हैरत नहीं होनी चाहिए। जेएनयू के तीन पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आज सक्रिय राजनीति में हैं। ये सभी वामपंथी रहे हैं, लेकिन आज कांग्रेस के नेता हैं।

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