रेलवे ने कबाड़ बेचकर कमाए 3000 करोड़ रुपये!

लगभग दिवालिया हो चुकी भारतीय रेल को पटरी पर लाने की कोशिश जारी है। इसी कोशिश के तहत रेलवे ने देश भर में पड़े अपने कबाड़ की नीलामी की और इससे 3000 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। पहले भी रेलवे अपने कबाड़ की नीलामी करता रहा है, लेकिन आज तक इतनी ज्यादा कमाई पहले कभी नहीं हुई। इसकी वजह से इस रेल बजट में ज्यादा चांस है कि यात्री किराया न बढ़ाया जाए।

ई-नीलामी के जरिए बेचा कबाड़

पहली बार रेलवे ने इंटरनेट के जरिए बोलियां मंगवाई थीं। इससे नीलामी में पारदर्शिता आई और बिना किसी भ्रष्टाचार के सरकारी खजाने में पूरी कीमत आई। सारा कबाड़ बेचने से पहले रेलवे ने प्रयोग के तौर पर दक्षिणी रेलवे जोन में ई-नीलामी शुरू की थी। इसमें कुछ कमियों का पता चला, जिनका ध्यान रखते हुए आगे बढ़ा गया।

रेलवे में होता है सबसे ज्यादा कबाड़

भारतीय रेल देश में कबाड़ पैदा करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। हर साल हजारों टन कबाड़ पैदा होता है, लेकिन ये सारा औने-पौने दामों पर ही बेचना पड़ता है। कई बार लोकल माफिया इसे औने-पौने दाम चुकाकर खरीद लेते थे। इसमें बड़े पैमाने पर करप्शन के आरोप भी लगते रहते थे। इस साल रेलवे ने करीब 15 हजार पुराने मालगाड़ी डिब्बे, 1,200 सवारी डिब्बे, 80 से 100 इंजन और भारी मात्रा में पटरियां बेचीं।

यात्री किराये बढ़ाने का दबाव कम हुआ

रेलवे अब पार्सल और दूसरे कमर्शियल ठेकों में भी इंटरनेट पर ही नीलामी शुरू करने जा रही है। यह भी अभी रेलवे में भ्रष्टाचार की एक बड़ी वजह है। इसी तरह अब एक लाख रुपये से ज्यादा की खरीद में रेलवे ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करेगी। इस सबसे आम लोगों को भी फायदा होगा, क्योंकि जो कमाई हो रही है, उसे रेलवे अपने पुराने घाटे को पाटने और नया इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने पर खर्च कर रही है। इसकी वजह से यात्री किराये बढ़ाने का दबाव कम हुआ है।

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