जीएसटी बिल को ‘चौपट’ करना चाहते हैं राहुल!

जनता की भलाई के एक और अहम फैसले के आगे राहुल गांधी दीवार बनकर खड़े हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को लेकर राहुल गांधी ने कुछ ऐसी शर्तें रख दी हैं, जिनसे जनता का भला कम और दिक्कतें ज्यादा बढ़ेंगी। वो भी तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की मुलाकात में आमराय बन चुकी थी। जीएसटी वह टैक्स है, जिसके अमल में आने के बाद पूरे देश में सामान और सेवाएं एक ही कीमत पर मिलेंगी।

क्या चाहते हैं राहुल गांधी?

1. राहुल गांधी का कहना है कि जीएसटी की अधिकतम सीमा 18% तय कर दी जाए। जबकि कांग्रेस के ही मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम जैसे एक्सपर्ट नेता मानते हैं कि यह फैसला गलत होगा। क्योंकि आगे कभी दरों में बदलाव की जरूरत पड़ी तो बार-बार कानून में बदलाव करना पड़ेगा। राहुल की बात मानी गई तो इसका असर यह होगा कि हर चीज पर 18% ही टैक्स होगा। आम आदमी की जरूरत की चीजों पर भी और अमीरों के लिए महंगे लग्ज़री सामान पर भी। इससे गरीबों को नुकसान और अमीरों को फायदा होगा। हालांकि यह अजीब बात है कि राहुल गांधी अपनी मांग को गरीबों की भलाई वाला बता रहे हैं।

2. राहुल का कहना है कि एक अलग ट्रिब्यूनल बनाया जाए जो जीएसटी को लेकर किसी भी तरह के विवाद पर सुनवाई करेगा। मतलब यह कि दरें तय करने का अधिकार सीधे कोर्ट के हाथ में चला जाएगा। इससे फैसलों में बेवजह देरी होगी। एक एक्सपर्ट के मुताबिक राहुल गांधी की यह मांग मानी गई तो जीएसटी का लगभग हर मामला कोर्ट पहुंच जाएगा और एक-एक फैसला आने में कई-कई साल लग जाएंगे।

क्या है राहुल गांधी की नीयत?

भले ही कांग्रेस पार्टी के बाकी नेता जीएसटी को और दिन तक रोकने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन राहुल गांधी के सलाहकारों की राय अलग है। वो चाहते हैं कि जब भी जीएसटी बिल पास हो, इसका क्रेडिट राहुल गांधी को मिले। भले ही इस चक्कर में संसद के कुछ सत्र और बेकार जाएं और जनता को महंगी चीजें खरीदनी पड़ें।

महंगाई कम होने से डर रहे हैं राहुल?

राहुल और उनके साथियों को लग रहा है कि अगर जीएसटी बिल पास हो गया और कई जरूरी चीजों के दामों में भारी गिरावट हो गई, तो इससे नरेंद्र मोदी सरकार की लोकप्रियता जनता में बढ़ जाएगी। साथ ही विकास दर में भी बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे नई नौकरियां पैदा होंगी और खुशहाली आएगी। ऐसे में अगर वो किसी तरह दबाव बनाकर जीएसटी बिल को कमजोर बनवा देते हैं तो इससे उन्हें सियासी फायदा होगा।

हमारे सूत्र के मुताबिक कांग्रेस के सीनियर नेता राहुल की थ्योरी से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि अगर जीएसटी बिल में और देरी हुई तो बीजेपी इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी और उसे कांग्रेस को बदनाम करने का मौका मिल जाएगा। मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के कई नेता इस बात को लेकर राहुल गांधी से मिल चुके हैं।

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