100 करोड़ बचाने के केजरीवाल के दावे पर सवाल

दिल्ली में बनी एक एलिवेटेड रोड को लेकर अरविंद केजरीवाल इन दिनों वाहवाही लूट रहे हैं। खुद उन्होंने विज्ञापन जारी करके अपनी तारीफ की, बाद में उद्घाटन के मौके पर शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने भी तारीफ कर दी। केजरीवाल का कहना है कि आजादपुर से प्रेमबाड़ी पुल को जोड़ने वाली 6-लेन की यह सड़क 143 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हो गई, जबकि इसके लिए 247 करोड़ रुपये का बजट पास हो चुका था। राज्य सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है कि उसने करीब 100 करोड़ रुपये बचा लिए। लेकिन जो जानकारी सामने आ रही है, वो कुछ और ही कहानी बयान कर रही है।

‘बचत का केजरीवाल का दावा गलत’

प्रोजेक्ट से जुड़े पीडब्लूडी के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि यह कहना गलत है कि 100 करोड़ रुपये की बचत की गई। दरअसल प्रोजेक्ट में काफी कटौती कर दी गई है, जिससे पैसे कम खर्च हुए। पहले इसे डबल पिलर्स पर बनना था, बाद में यह हुआ कि सिंगल पिलर्स ही लगेंगे। इसके अलावा बीते एक साल में सीमेंट, लोहा और कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाली दूसरी कई चीजों के दाम काफी कम हुए हैं। इस वजह से भी लागत कम बैठी।

क्या कहते हैं पिछले पीडब्लूडी मंत्री?

शीला दीक्षित के वक्त पीडब्लूडी मंत्री रहे राजकुमार चौहान ने एलिवेटेड रोज का यह प्रोजेक्ट पास किया था। उनका कहना है कि ‘यह प्रोजेक्ट विकासपुरी से नोएडा तक सिग्नल फ्री करने के लिए था, ताकि पश्चिमी दिल्ली से उत्तरी, पूर्वी दिल्ली और नोएडा आसानी से आया-जाया जा सके। इसमें से 2 प्रोजेक्ट खत्म कर दिए गए हैं। जैसे कि चंदगीराम अखाड़े और मजनूं का टीला पर अब भी ट्रैफिक रुकेगा। केजरीवाल सरकार ने सिर्फ उस हिस्से के प्रोजेक्ट को पूरा करवाया, जहां काम शुरू हो चुका था, बाकी को ड्रॉप कर दिया। इसके अलावा उसी वक्त 32 रोड प्रोजेक्ट्स के लिए स्टडी शुरू हुई थी। केजरीवाल सरकार ने उन सबको रुकवा दिया है।

‘247 करोड़ के प्रोजेक्ट की बात गलत’

राजकुमार चौहान का कहना है कि यह प्रोजेक्ट मैंने खुद अपने हाथों से पास किया था और मुझे अच्छे से याद है कि टेंडर 168 करोड़ रुपये का था। उस वक्त यह रकम सीमेंट, लोहे और दूसरे रॉ मैटीरियल के मार्केट रेट के हिसाब से तय किया गया था। इसके अलावा यहां फुटओवर ब्रिज भी बनना तय था। उसे भी ड्रॉप कर दिया गया है।

क्या है इस सड़क का मामला?

दरअसल शीला दीक्षित सरकार के समय इस एलिवेटेड रोड का प्रोजेक्ट पास हुआ था। शीला दीक्षित के रहते इस सड़क का कुछ काम पूरा हो गया था, बाकी काम केजरीवाल सरकार के आने के बाद पूरा हुआ। पहले तो केजरीवाल ने विज्ञापन जारी करके पूरे प्रोजेक्ट का क्रेडिट खुद ले लिया। बाद में जब आलोचना हुई तो उन्होंने उद्घाटन समारोह में शीला दीक्षित को भी क्रेडिट दिया कि उन्होंने इस सड़क की परियोजना शुरू की। 1.6 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कॉरिडोर से अशोक विहार, शालीमार बाग और वजीरपुर में जाम से छुटकारा मिलेगा और आना-जाना आसान होगा।

दिल्ली में लटके पड़े हैं कई दूसरे प्रोजेक्ट

अरविंद केजरीवाल सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग है। दिल्ली में शीला दीक्षित के वक्त में शुरू किए गए कई प्रोजेक्ट्स पर काम रुका हुआ है। कुछ पर काम कछुए की रफ्तार से चल रहा है। बारापुला को मयूर विहार से जोड़ने का प्रोजेक्ट बेहद धीमी रफ्तार से चल रहा है। कुछ ऐसा ही हाल वजीराबाद में बन रहे सिग्नेचर ब्रिज का है।

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