क्या ‘सेटिंग’ करके हार गए केजरीवाल के वकील?

क्या दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार बिजली कंपनियों के ऑडिट का मुकदमा हाई कोर्ट में जानबूझकर हार गई? यह सवाल उठने के बाद सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पिछले हफ्ते ही दिल्ली हाई कोर्ट ने तीन निजी बिजली कंपनियों का सीएजी से ऑडिट कराने का आदेश खारिज कर दिया था। राजनीतिक दलों के अलावा मामले से जुड़े ऊर्जा नाम के एक एनजीओ ने भी खुलकर आरोप लगाया था कि अदालत में ठीक से दलील नहीं दी गई, ताकि केस हारा जा सके। मामले की जांच आम आदमी पार्टी से जुड़े वकील राहुल मेहरा करेंगे। उन्हें एक हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

क्या है पूरा मामला?

बिजली कंपनियों के खातों की जांच के लिए केजरीवाल सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में आदेश दिया था। बिजली कंपनियों ने इस आदेश को अदालत में चुनौती दे रखी है। फरवरी में दूसरी बार सरकार बनने के बाद केजरीवाल सरकार ने सीनियर एडवोकेट राजीव धवन को दिल्ली हाई कोर्ट में अपना केस लड़ने के लिए नियुक्त किया। उसके बाद मामले की सिर्फ 2 सुनवाई हुईं। इस दौरान तारीखों पर सरकार द्वारा नियुक्त वकील खुद भी मौजूद नहीं रहे। इस बात ने बीजेपी और कांग्रेस को हमले का मौका दे दिया। विपक्ष का आरोप है कि बिजली कंपनियों के खिलाफ लड़ाई की बात कहने वाले केजरीवाल ने अंदर ही अंदर उनसे ‘सेटिंग’ कर ली है।

क्या कह रही है आम आदमी पार्टी?

पार्टी ने यह कहते हुए केजरीवाल सरकार का बचाव किया है कि जांच के आदेश से सच्चाई सामने आ जाएगी। पार्टी प्रवक्ता ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि कांग्रेस खुद बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचाने की दोषी रही है।
मामले की जांच का दिल्ली सरकार का आदेश नीचे देखा जा सकता है।

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