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अवॉर्ड लौटाने का दिखावा कर रहे हैं साहित्यकार?

नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से देश में सांप्रदायिक माहौल खराब होने की बात कहकर अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वालों की लिस्ट बढ़ती जा रही है। अब तक करीब 2 दर्जन लेखकों और साहित्यकारों ने अपना अवॉर्ड लौटाने का एलान किया है। लेकिन सच्चाई कुछ और ही मालूम हो रही है। पुरस्कार लौटाने का एलान मीडिया में करने वाले ज्यादातर साहित्यकार या कलाकार अब तक इस बारे में औपचारिक चिट्ठी लिखने का वक्त नहीं निकाल सके हैं।

न रकम लौटाई, न मेडल

नयनतारा सहगल के साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का सिलसिला शुरू हुआ था। अब तक कुल 23 लोगों ने इसकी घोषणा की है, लेकिन इनमें से सिर्फ 8 ने औपचारिक चिट्ठी साहित्य अकादमी को भेजी है। इन आठ में से भी सिर्फ उदय प्रकाश, अशोक वाजपेयी और अमन सेठी ने साहित्य अकादमी का दिया स्मृति चिन्ह और पुरस्कार में मिलने वाली रकम लौटाई है। अभी साहित्य अकादमी पुरस्कार में एक लाख रुपये, शॉल और स्मृति चिन्ह दिया जाता है।

सिर्फ साहित्य अकादमी ही क्यों?

यह सवाल भी उठ रहा है कि साहित्यकार सिर्फ साहित्य अकादमी पुरस्कार ही क्यों लौटा रहे हैं। जबकि साहित्य अकादमी सरकारी संस्था नहीं है। कुछ साहित्यकारों के पास पद्म पुरस्कार भी हैं। लेकिन अब तक एक दलीप कौर तिवाना के अलावा एक ने भी इसे लौटाने की घोषणा नहीं की है।

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