दिल्ली मेट्रो पर पहला हक़ सिर्फ दिल्लीवालों का हो?

दिल्ली सरकार चाहती है कि दिल्ली मेट्रो पर पहला हक़ दिल्ली वालों का ही रहे। नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीबाद जैसे शहरों में रहने वालों के लिए मेट्रो की सुविधा वैसी न हो जैसी दिल्ली के लिए होती है। हिंदी अखबार अमर उजाला  में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक केजरीवाल सरकार ने इस बारे में दिल्ली मेट्रो (DMRC) को एक चिट्ठी भी लिखी थी।

क्या है दिल्ली सरकार का इरादा?

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक केजरीवाल सरकार चाहती है कि पीक आवर्स में हर दूसरे या तीसरी मेट्रो बॉर्डर के आखिरी स्टेशन से ही वापस लौटा दी जाए। इससे मेट्रो में एनसीआर के दूसरे शहरों में रहने वालों की भीड़ कम होगी। नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव या फरीदाबाद जाने वालों को मेट्रो के लिए ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा और उनमें भीड़ भी ज्यादा होगी। सीएम केजरीवाल ने मेट्रो के एमडी डॉ. मंगू सिंह से मुलाकात करके ये शिकायत की थी कि मेट्रो में ज्यादा भीड़ की वजह से दिल्ली के लोगों को दिक्कत हो रही है। सरकार ने करीब तीन महीने पहले चिट्ठी लिखकर मेट्रो का शेड्यूल, दिल्ली के यात्रियों और एनसीआर के यात्रियों की संख्या के आंकड़े मांगे थे।

दिल्ली वालों को कैसे होगा फायदा?

अभी ब्लूलाइन रूट पर चलने वाली मेट्रो वैशाली, कौशांबी से ही भरकर आती हैं। इसी तरह नोएडा से आने वाली मेट्रो सेक्टर 18 तक आते-आते भर जाती हैं। ऐसे में दिल्ली के बॉर्डर के इलाकों वाले स्टेशनों से चढ़ना मुश्किल हो जाता है। गुड़गांव और फरीदाबाद रूटों पर भी यही शिकायत रहती है। अगर दिल्ली के आखिरी स्टॉप तक अलग ट्रेन चलें तो दिल्ली वालों के लिए फ्रीक्वेंसी बढ़ जाएगी।

केजरीवाल के इरादे में क्या है अड़चन?

दरअसल दिल्ली मेट्रो बनाई ही इसलिए गई थी कि दूर इलाकों में रहने वाले लोग आसानी से शहर में आ जा सकें। ऐसा नहीं है कि सिर्फ एनसीआर के शहरों से लोग दिल्ली में काम करने आते हैं, दिल्ली से भी उतनी ही संख्या में लोग एनसीआर के शहरों में नौकरी के लिए आते-जाते हैं। जाहिर है मेट्रो पर दिल्ली वालों का पहला हक़ के केजरीवाल के फॉर्मूला का विरोध होना तय है।

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