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जहां था रामसेतु, वहां अब बनेगा हनुमान सेतु!

जिस रास्ते से भगवान राम भारत से लंका गए थे, वो रास्ता बहुत जल्द फिर से खुल सकता है। भारत में धनुषकोड़ी से लेकर श्रीलंका के तलईमन्नार के बीच पुल बनाने की योजना पर विचार चल रहा है। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बन जाती है तो समुद्र के अंदर से टनल या फिर ऊपर से पुल बनाया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) फंड देने को भी तैयार है। इस पुल का नाम हनुमान सेतु रखने की भी बात हुई है।

दोनों देशों के बीच बातचीत हो चुकी है

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत और श्रीलंका के प्रधानमंत्रियों के बीच इस मसले पर बातचीत हो चुकी है। अगले महीने दोनों देशों के सचिवों की मुलाकात में इस पर आगे की बात होगी। अगर ये पुल बन जाता है तो पूरा दक्षिण भारत सीधे श्रीलंका से जुड़ जाएगा। इससे दोनों देशों में टूरिज़्म और कारोबार कई गुना बढ़ जाएगा।


सिर्फ 22 किलोमीटर की है दूरी

तमिलनाडु में धनुषकोड़ी से श्रीलंका के तलईमन्नार के बीच दूरी सिर्फ 22 किलोमीटर के करीब है। इसमें भी सिर्फ ढाई किलोमीटर का हिस्सा ऐसा है, जहां समुद्र की गहराई थोड़ी ज्यादा है। एक बार फैसला होने के बाद तय होगा कि पुल किस तरह का हो। एक विकल्प ये भी है कि एक साथ ही सड़क और रेल लाइन दोनों बिछाई जाए। मतलब ये कि एक ही पुल से ट्रेन और सड़क दोनों जाएगी।

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क्या है धनुषकोड़ी का महत्व?

धनुषकोडी रामेश्‍वरम द्वीप पर बसा एक गांव है। यह गांव श्रीलंका के तलाईमन्नार की सीध में पड़ता है। कहा जाता है कि लंका पर विजय के बाद विभीषण ने भगवान राम से अनुरोध किया था कि वो समंदर पर बने रामसेतु को तोड़ दें। जिसके बाद राम ने एक ही बाण में सेतु को तोड़ दिया था। यहां पर समुद्र का पानी काफी पवित्र माना जाता है। लोग यहां पर स्नान करते हैं। कहते हैं कि जो फल काशी में गंगा स्नान से मिलता है, वही फल यहां मिलता है।

 

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