नेताजी की सीक्रेट फाइलों में अब तक क्या-क्या निकला?

पश्चिम बंगाल सरकार ने जिन 64 फाइलों को पब्लिक किया है, उनमें से एक फाइल ऐसी भी है जिसमें सिर्फ कवर है और अंदर के पन्ने गायब हैं। सवाल ये है कि ये पन्ने किसने गायब कराए और इस फाइल में ऐसा क्या था, जिसे छिपाना जरूरी था। सीएम ममता बनर्जी ने नेताजी के जिन रिश्तेदारों को ये फाइलें सौंपी हैं, उन्होंने भी इसे लेकर सवाल उठाए हैं। बाकी जिन फाइलों को अब तक पढ़ा जा चुका है उसका निचोड़ कुछ इस तरह से है।

  • आईबी के 14 अफसरों को अकेले नेताजी के भतीजे अमियनाथ बोस की जासूसी के लिए लगाया गया था।
  • नेताजी के परिवार ही नहीं, उनसे करीबी के शक वाले हर शख्स की जासूसी करवाई गई।
  • आजादी के करीब दो साल बाद नेता जी ने कम से कम दो बार अपने परिवार से संपर्क करने की कोशिश की थी।
  • एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक इन फाइलों में ऐसे सबूत हैं, जिनसे पता चलता है कि नेताजी 1964 तक जिंदा थे।
  • इन फाइलों में 1960 के आसपास तैयार कराई गई एक अमेरिकी रिपोर्ट भी अटैच है, जिसमें कहा गया है कि नेता जी फरवरी 1964 में चोरी छिपे भारत पहुंच गए थे।
  • फाइलों में लिखा है कि 1948-49 में अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया एजेंसियां मानती थीं कि नेताजी जिंदा हैं वो उनकी तलाश भी करती रही थीं।
  • ब्रिटिश एजेंसियों की राय थी कि नेता जी या तो रूस या चीन में हैं।
  • ये फाइलें बंगाल आईबी की हैं, बहुत सारी जानकारियां केंद्र सरकार के पास जमा फाइलों में दर्ज हैं। इसलिए पूरी सच्चाई तब सामने आएगी, जब केंद्र सरकार इन फाइलों को जारी कर देगी।

मोदी सरकार जल्द जारी करेगी फाइलें

सरकारी सूत्रों के मुताबिक नरेंद्र मोदी सरकार बहुत जल्द फाइलों को सार्वजनिक करने की तैयारी में है। उससे पहले इनसे जुड़े सभी तथ्यों और दूसरे तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। ममता बनर्जी ने फटाफट फैसला करके अपने यहां की फाइलों को इसलिए जारी करवा दिया ताकि मोदी से पहले वो इसका श्रेय ले सकें।

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