लोकायुक्त पर अब केजरीवाल को जल्दी नहीं!

मुख्यमंत्री के तौर पर 49 दिन के अपने पहले शासन में अरविंद केजरीवाल ने हाथों में जनलोकपाल बिल की कॉपी लहराते हुए इस्तीफा दे दिया था।

दिल्ली में लोकायुक्त की तैनाती 28 अक्टूबर तक की जाएगी। दिल्ली हाई कोर्ट में खिचाई के बाद केजरीवाल सरकार ने कोर्ट में ये भरोसा दिया है। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंदर गुप्ता ने हाई कोर्ट में एक याचिका दे रखी है, जिस पर सुनवाई के दौरान ये बात सामने आई है। विजेंदर गुप्ता ने ये मांग की है कि लोकायुक्त की नियुक्ति जल्द की जाए और इसके लिए नेता विपक्ष होने के नाते उनसे भी राय ली जाए।

अब नहीं है कोई हड़बड़ी

अन्ना आंदोलन के दौरान लोकपाल और लोकायुक्त के लिए अरविंद केजरीवाल एक दिन भी देरी के लिए तैयार नहीं थे। 49 दिन की अपनी पहली सरकार तो उन्होंने लोकायुक्त के नाम पर ही गिरा दी थी। अब सत्ता में आए 7 महीने से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रॉसेस भी स्टार्ट नहीं हुआ है। नियुक्ति का भरोसा दिया भी है तो करीब डेढ़ महीने बाद का। दिल्ली में बीते करीब 21 महीने से कोई लोकायुक्त नहीं है। भ्रष्टाचार के कई मामले लटके पड़े हैं। लोकायुक्त अधिनियम के तहत ये पद 6 महीने से ज्यादा खाली नहीं रह सकता।

अब क्यों पीछे हट रहे हैं केजरीवाल?

असेंबली में विपक्ष के नेता विजेंदर गुप्ता का कहना है कि ‘केजरीवाल को लोकायुक्त का डर सता रहा है। क्योंकि अगर लोकायुक्त नियुक्त हो गया तो आम आदमी पार्टी के कई विधायकों को जेल की हवा खानी पड़ जाएगी। इसलिए केजरीवाल चाहते हैं कि लोकायुक्त उनकी पसंद का हो।’ यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है कि लोकपाल और लोकायुक्त के नाम पर ही अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले अरविंद केजरीवाल अब इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं और विपक्षी पार्टी लोकायुक्त की मांग कर रही है। यहां तक कि उपराज्यपाल भी अब तक इस मसले पर 3 चिट्ठियां सरकार को भेज चुके हैं, लेकिन केजरीवाल सरकार की तरफ से अब जाकर एक पक्की तारीख बताई गई है।

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