रिटायर्ड फौजी अब ‘बेरोजगार’ नहीं रहेंगे

वन रैंक, वन पेंशन लागू करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अफसरों से जानकारी मांगी है कि फौज से जल्दी रिटायर होने के बाद ज्यादातर जवान क्या करते हैं। क्या इन फौजियों को बीएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों में शामिल नहीं किया जा सकता, ताकि उनकी ट्रेनिंग का सही इस्तेमाल देश के लिए किया जा सके। खबर है कि पीएम चाहते हैं कि ये स्कीम जल्द से जल्द लागू कर दी जाए।

फौज से रिटायर, लेकिन फौजी तो हैं

सेना को लड़ाई के लिए फिट रखने की नीयत से लगभग 35 साल से ऊपर के फौजी रिटायर कर दिए जाते हैं। ये जवान भले ही इतनी कम उम्र में रिटायर हो जाते हैं, लेकिन इनके पास फौज की कड़ी ट्रेनिंग और अनुशासन होता है। मोदी ने यही सवाल उठाया है कि सैनिकों को एक लंबी उम्र तक घर बैठे पेंशन लेने के भरोसे छोड़ना कहां तक उचित है।

अर्धसैनिक बलों में जा सकते हैं पूर्व सैनिक

ऐसी खबर है कि जवानों को ये विकल्प दिया जाएगा कि वो अगर चाहें तो फौज के बाद अर्धसैनिक बलों में शिफ्ट हो जाएं। इससे जवानों की ट्रेनिंग का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। प्रधानमंत्री ने इसी पर एक प्लान अपने अफसरों से मांगा है। उन्होंने ये भी पूछा है कि अब तक ये काम क्यों नहीं किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सियाचिन के फौजियों के साथ दिवाली मनाई थी। सियाचिन बेस कैंप की ये तस्वीर 23 अक्टूबर 2014 की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सियाचिन के फौजियों के साथ दिवाली मनाई थी। सियाचिन बेस कैंप की ये तस्वीर 23 अक्टूबर 2014 की है।


सिविलियन नौकरियों में फिट नहीं होते जवान

पूर्व सैनिकों को दोबारा रोजगार देने के लिए यूं तो बहुत सारी स्कीमें चलती हैं, लेकिन देखा यही गया है कि वो आम नौकरियों में खुद को ढाल नहीं पाते। ऐसे में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और एनडीआरएफ जैसी पैरा-मिलिट्री फोर्सेज़ में उन्हें बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा। यहां वो 60 साल की उम्र तक सर्विस भी कर सकेंगे।

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