अब लॉन्ग ड्राइव पर दिल्ली से चलो बैंकॉक!

अब आप भारत से थाईलैंड तक सड़क के रास्ते भी जा सकेंगे। म्यांमार होकर जाने वाली ये सड़क दरअसल एशियन हाइवे का हिस्सा है। रविवार को म्यांमार और थाईलैंड के नेताओं की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच म्यावडी से लेकर कॉकरिक के बीच सड़क संपर्क का का उद्घाटन किया गया। ये पूरा इलाका म्यांमार और थाईलैंड के बीच में पड़ता है। एशियन हाइवे मणिपुर में मोरे नाम की जगह से म्यांमार की सीमा में पहुंचाता है। वहां राजधानी रंगून होते हुए हाइवे का आखिरी छोर थाईलैंड में बैंकॉक के करीब खत्म होगा। ये पूरा हाइवे 4 लेन का है।

भारत-थाईलैंड हाइवे के फायदे

नए हाइवे से भारत, म्यांमार और थाईलैंड के बीच कारोबार कई गुना बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही टूरिज्म में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। फिलहाल इंफाल और म्यांमार के शहर मंडालय के बीच बस सर्विस शुरू करने पर भी बातचीत चल रही है।

क्या है एशियन हाइवे?

दरअसल ये पूरे एशिया को सड़क से जोड़ने के एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट का एक हिस्सा भर है। इसके तहत एशियन हाइवे-1 (AH-1) सबसे लंबी सड़क कही जा सकती है। इसकी कुल लंबाई 20,557 किलोमीटर होगी। ये हाइवे जापान को टोक्यो से कोरिया, चीन, हॉन्गकॉन्ग, थाइलैंड, म्यांमार, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान होते हुए यूरोप के देश टर्की तक को जोड़ेगी। टर्की के इस्तांबुल में ये हाइवे यूरोपियन हाइवे नंबर E-80 से मिल जाएगा। इस रूट पर कुल 15 देश पड़ेंगे। अभी इस हाइवे की कड़ियों पर काम चल रहा है। नीचे जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो दुर्गापुर एक्सप्रेसवे है जो एशियन हाइवे का हिस्सा है।

Durgapur_Xpressway

सौजन्य- wikipedia

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