‘असली-नकली’ के झगड़े पर हाई कोर्ट का फैसला, स्वरूपानंद ही हैं ओरिजनल शंकराचार्य

हिंदुओं के सबसे बड़े धर्म गुरु शंकराचार्य की पदवी पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ही ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य हैं। स्वामी वासुदेव नाम के एक दूसरे धर्म गुरु ने इस पद पर अपना दावा किया था।

  • स्वामी स्वरूपानंद अब द्वारकापीठ और ज्योतिर्पीठ दोनों के ही शंकराचार्य होंगे।
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शंकराचार्य स्वरूपानंद के पक्ष में अंतरिम आदेश दिया है।
  • साथ ही निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने की स्वामी वासुदेवानंद की याचिका नामंजूर कर दी है।
  • अदालत में स्वामी वासुदेवानंद अपने पक्ष में वसीयत को सही साबित नहीं कर पाए।
  • इलाहाबाद की जिला अदालत ने इसी साल 5 मई को स्वामी वासुदेवानंद के ज्योतिर्पीठ का शंकराचार्य होने को अवैध करार दिया था।
  • अदालत ने ही वासुदेवानंद को शंकराचार्य पद नाम इस्तेमाल करने पर भी रोक लगा दी थी।
  • जिला अदालत के फैसले के खिलाफ वासुदेवानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी।

 

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