शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते दिल्ली में बिजली कंपनियां 8000 करोड़ रुपये लूट ले गईं!

दिल्ली में बिजली कंपनियों की लूट की पोल आखिरकार खुलती दिख रही है। सीएजी ने बिजली कंपनियों का ऑडिट किया था। जिसकी एक अंतरिम रिपोर्ट सामने आई है। इसके मुताबिक घाटा दिखाकर बिजली कंपनियों ने 8000 करोड़ रुपये का नाजायज मुनाफा कमाया। दिल्ली में रिलायंस की दो कंपनियां (BSES राजधानी, BSES यमुना) और टाटा की एक कंपनी (TPDDL) बिजली सप्लाई करती हैं। अभी फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। अगर ये आरोप साबित हो जाता है तो कॉरपोरेट सेक्टर के हाथों ये लूट का शायद सबसे बड़ा मामला होगा। क्योंकि ये पैसे सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि सीधे जनता की जेब से निकाले गए हैं। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में ये 5 बड़ी बातें हैं।

 

  1. तीनों ही बिजली कंपनियों ने उपभोक्ताओं की कुल संख्या से भी ज्यादा मीटर लगाने का दावा किया है।
  2. तीनों ही कंपनियां गारंटी के बावजूद खराब और तेज़ भागने वाले मीटरों को बदलने के लिए जनता से ही पैसे वसूले।
  3. ये मीटर बिजली कंपनियों ने अपनी ही सहयोगी कंपनियों से मार्केट प्राइस से ज्यादा दाम पर खरीदे थे।
  4. बिजली कंपनियों ने जानबूझकर महंगी बिजली खरीदी और घाटा दिखाकर दरें बढ़वाने के लिए दबाव बनाया।
  5. रिपोर्ट में दिल्ली में बिजली नियामक संस्था DERC के रोल पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

 

क्या कहती है आम आदमी पार्टी

सीएजी के ऑडिट नतीजों से आम आदमी पार्टी बेहद खुश है और अपनी जीत के तौर पर देख रही है। उन्होंने कहा है कि कानून के तहत जो सबसे सख्त सज़ा है वो दी जाएगी। पार्टी ने बिजली बिल के मुद्दे पर ही पहला चुनाव लड़ा था और सरकार बनाने के बाद सीएम केजरीवाल ने बिजली कंपनियों का ऑडिट कराने का आदेश दिया था।

क्या कहती है बीजेपी

बीजेपी भी बिजली कंपनियों के ऑडिट की मांग करती रही है। पार्टी नेता विजय गोयल ने कहा है कि चोरी का खुलासा होने के बाद अब बिजली कंपनियों के लाइसेंस जब्त कर लिए जाने चाहिए। केजरीवाल की पार्टी बनने से पहले शीला दीक्षित सरकार के दौरान बीजेपी ने बिजली कंपनियों के खिलाफ कई बड़े आंदोलन भी किए थे।

कांग्रेस अब क्या कह रही है

सीएजी ऑडिट के नतीजों से कांग्रेस सकते में दिख रही है। हालांकि पार्टी के नेता जेपी अग्रवाल ने कहा है कि अगर कंपनियों ने धांधली की है तो उनकी पार्टी कंपनियों के साथ नहीं है।

बिजली कंपनियां अब क्या कह रही हैं

सीएजी की अंतरिम रिपोर्ट लीक होने पर बिजली कंपनियों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मामला अभी हाई कोर्ट में है और अभी तक सीएजी ने मामले पर उनका पक्ष नहीं लिया है।

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