गड्ढा खोदना हो या नेत्रदान करना हो… दिल्ली में हर काम के लिए हाजिर है हेल्पलाइन नंबर!

क्या आपको लगता है कि दिल्ली में कोई किसी की मदद नहीं करता है? हो सकता है आप सही हों, लेकिन कोई किसी की मदद करे या न करे, लेकिन दिल्ली में हर बात के लिए एक हेल्पलाइन हाजिर है। दरअसल दिल्ली को अगर हेल्पलाइनों का शहर कहें तो गलत नहीं होगा। दिल्ली में इस समय तकरीबन 100 हेल्पलाइनें चल रही हैं, ये अलग बात कि दिल्ली के लोग हेल्पलेस हैं।

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  • दिल्ली में सबसे ज्यादा इस्तेमाल पुलिस की 100 नंबर हेल्पलाइन इस्तेमाल होती है।
  • इसके बाद फायर और एंबुलेंस की हेल्पलाइन 101 और 102 का नंबर आता है।
  • 100 नंबर के अलावा पुलिस की एक और हेल्पलाइन है जिसका नंबर है 1944, लेकिन इसके बारे में कम लोग ही जानते हैं।
  • बच्चे गुम हो जाएं या चाइल्ड लेबर की शिकायत करनी हो तो 1098 हेल्पलाइन आपकी सेवा में हाजिर है।
  • महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली महिला आयोग ने ढेर सारे हेल्पलाइन दे रखे हैं। ये नंबर हैं- 181, 1800119292, 01123379181 और 01123370597.
  • अगर आप नेत्रदान करना चाहते हैं तो उसके लिए हेल्पलाइन का नंबर 1919 है।
  • वीआईपी कंप्लेंट्स के लिए 178 नंबर है
  • किसी राष्ट्रीय आपदा के लिए 1070 हेल्पलाइन का इंतजाम है।
  • छात्रों के लिए दिल्ली पुलिस की अलग हेल्पलाइन है, इसका नंबर है 1291
  • इसके अलावा अगर आप दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़ी कोई मदद चाहते हैं तो उसके लिए 155215 हेल्पलाइन नंबर है।
  • एमसीडी से जुड़ी कोई शिकायत करनी हो तो आप 1266 नंबर पर डायल कर सकते हैं
  • इतना ही नहीं अगर आप कहीं गड्ढा खोदना चाहते हैं तो उसके लिए आपको पहले हेल्पलाइन नंबर 1949 पर फोन करना होगा।
  • दिल्ली में इनकम टैक्स से जुड़ी कोई जानकारी चाहिए तो 1961 हेल्पलाइन नंबर आपकी सेवा के लिए है
  • दिल्ली सरकार की 1031 हेल्पलाइन सबसे ज्यादा हाईप्रोफाइल है। इसे करोड़ो रुपये खर्च करके लॉन्च किया गया था। लेकिन अब ये नंबर तकरीबन बेकार पड़ा हुआ है।  केजरीवाल सरकार से तनाव के बीच ACB ने अपना नया नंबर जारी किया है- 01123812905, 011223812906
  • कुल मिलाकर महिला सुरक्षा के लिए 5 हेल्पलाइन नंबर चल रहे हैं। भ्रष्टाचार दूर करने के लिए 12 से ज्यादा हेल्पलाइन नंबर हैं।

वैसे तीन और चार अंकों वाले कई हेल्पलाइन नंबर जनता के लिए किसी काम के नहीं हैं। क्योंकि ये सिर्फ लैंडलाइन फोन से ही मिलाए जा सकते हैं। जबकि आजकल ज्यादातर लोग अपने पास मोबाइल फोन ही रखते हैं और जरूरत पड़ने पर ऐसी तमाम हेल्पलाइनें हेल्पलेस हो जाती हैं।

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