जिस पहाड़ के नीचे भगवान काशी विश्वनाथ विराजते हैं वो टूटता जा रहा है

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक पहाड़ खुद-ब-खुद टूटता जा रहा है। वरुणावत नाम के इस पहाड़ में इतनी तेज़ी से लैंडस्लाइड हो रहे हैं कि इसके पूरी तरह खत्म हो जाने की आशंका भी जताई जा रही है। 15 जुलाई के बाद से वरुणावत पर्वत में लगातार चट्टानें टूट रही हैं और अब इसमें मोटी दरारें पड़ गई हैं।
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2003 Landslide Varunavat Hill

12 साल बाद इस पहाड़ में ऐसी हरकत शुरू हुई है। 2003 में भी इस पहाड़ पर काफी लैंडस्लाइड हुआ था। तब बिना बारिश के ही 40 दिन तक लगातार चट्टानें गिरती रही थीं। जिसके बाद लैंडस्लाइड ट्रीटमेंट करना पड़ा था। इसके बाद पहाड़ में चट्टानों का टूटना बंद हो गया था। तब केंद्र सरकार ने इस काम के लिए 282 करोड़ रुपये दिए थे। उस वक्त ये पहली बार था जब किसी पहाड़ पर लैंडस्लाइड रोकने के लिए उसका ट्रीटमेंट किया गया था।

Varunavat

वरुणावत पहाड़ से टूट रही चट्टानों की वजह से इसकी तलहटी में बसे लगभग 10 हजार लोगों पर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही वरुणावत पर्वत से गंगोत्री जाने वाली सडक़ को भी बंद करना पड़ा है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि वरुणावत पर हो रही लैंडस्लाइड की वजह शायद इसके अंदर ही छिपी है। पहाड़ के अंदर हो रही एक्टिविटीज की वजह से ये टूटता जा रहा है।

वरुणावत पर्वत को लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि कलयुग की शुरुआत होने पर भगवान काशी विश्वनाथ ने हिमालय का रुख कर लिया था। इसी वरुणावत पर्वत के नीचे असी वरुणा और भगीरथी नदियों के बीच उन्होंने खुद को स्थापित कर लिया था। यहां पर एक प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर भी है। इसीलिए इसे कलयुग का काशी भी कहते हैं। उत्तरकाशी आने वाले पर्यटक इस मंदिर में दर्शन के लिए जरूर आते हैं।

Kashi vishwnath

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